Monday, June 19, 2023

अशरा-ए-ज़िल्हिज्जा किस तरह गुजारें?

अशरा-ए-ज़िल्हिज्जा किस तरह गुज़ारें?

जैनुल आबिदीन क़ासमी
ख़ादिम जामिया क़ासमिया अशरफ़ुल उलूम नवाबगंज अलियाबाद जि० बहराइच यू०पी० 
9670660363


आज दिनांक 30 जून 2022 ई० को इस्लामी/हिज्री कैलेंडर के आख़िरी और बारहवें महीना ज़ुल्हिज्जा का चांद निकल आया है, इस महीने की 1 तारीख़ से 10 तारीख़ तक को अशरा-ए-ज़िल्हज्जा कहते हैं, अशरा-ए-ज़िल्हिज्जा की बाबरकत और फ़ज़ीलत वाली साअतें शुरू हो चुकी हैं, जैसा कि क़ुरआन व हदीस की रोशनी में इन दस दिनों की फ़ज़ीलतैं आई हैं, सबसे बड़ी फ़ज़ीलत तो यही है कि इन दस दिनों के अंदर किया जाने वाला हर नेक अमल अल्लाह तआला को बहुत महबूब और पसंदीदा है; लिहाज़ा अब हम सबको चाहिए कि नेक अमल की कसरत शुरू कर दें।

⚫ सबसे पहले तो ये तै करलें कि पांचों नमाज़ैं बा जमाअत अदा करने का एहतिमाम करेंगे, इस के लिए मस्जिद जल्दी पहुंचने की कोशिश करें ताकि तक्बीरे ऊला ही से इमाम के साथ शरीक रहें।

⚫ सुन्नते मुअक्कदा व सुन्नते ग़ैर मुअक्कदा और नवाफ़िल का भी एहतिमाम करें, जिन नमाज़ों के बाद दो रकातैं नफ़्ल पढ़ते थे तो अब नफ़्ल की रकातों को दो से बढ़ा लें, कम से कम चार या छः या आठ या जिस क़दर हो सके पढ़ें।

⚫ तहज्जुद की नमाज़ पढ़ने का एहतिमाम ज़रूर करें, नीज़ इशराक़, चाश्त, औव्वाबीन की नमाज़ों का भी एहतिमाम करें।

⚫ वुज़ू घर या दूकान पर बनाएं और वहीं दो रकात तहिय्यतुल वुज़ू पढ़ें, फिर मस्जिद पहुंच कर दो रकात तहिय्यतुल मस्जिद पढ़ें।

⚫ मस्जिद पहुंचने के बाद तहिय्यतुल मस्जिद और सुन्नत पढ़ कर फ़ारिग़ हो‌ जाएं और जमाअत खड़ी होने में अभी वक़्त बाक़ी हो तो तस्बीह (सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिही  सुब्हानल्लाहिल ज़ीम), इस्तिग़फ़ार (अस्तग़्फ़िरुल़्लाहल्लज़ी ला इला ह इल्ला हुवल हय्युल क़ैय्यूम  व अतूबु इलैह) और दुरूद शरीफ़ पढ़ते रहें।

⚫ हर नमाज़ से पहले और बाद में थोड़ी देर क़ुरआने करीम पढ़ने का मामूल बना लें।

⚫ क़ुरआने करीम इस कसरत से पढ़ें कि दस दिनों के अंदर कम से कम एक बार पूरा क़ुरआन ख़त्म कर दें, या फिर जितना भी हो सके पढ़ें।

⚫ हर वक़्त बावुज़ू रहने की कोशिश करें, जब भी वुज़ू टूटे तो फौरन वुज़ू बना लें, नमाज़ का वक़्त आने का इंतिज़ार न करें।

⚫ हर ख़ाली वक़्त में ज़ुबान पर तस्बीह, इस्तिग़फ़ार, दुरूद शरीफ़ जारी रहे।

⚫ हस्बे हैसियत सदक़ा ख़ैरात करते रहें।

⚫ ग़रीबों, मुहताजों, ज़रूरतमंदों की ख़बरगीरी करते रहें। (इस इंतिज़ार में न रहें कि कोई मांगने वाला आए तब दूं; बल्कि ख़ुद पता लगाने की कोशिश करें कि कौन ज़रूरतमंद है? किस को किस चीज़ की ज़रूरत है?

⚫ अपनी मस्जिदों के इमाम व मुअज़्ज़िन, मदरसों/मक्तबों में पढ़ाने वाले उलमा व  हुफ़्फ़ाज़ को हदया व तोहफ़ा भी देने की कोशिश करें।

⚫ गुनाहों से दूर रहने की पूरी कोशिश करें।

⚫ हमारे जिस्म के जिन आज़ा से गुनाह ज़्यादा सादिर होते हैं उनके इस्तिमाल में काफ़ी एहतियात बरतें। जैसे आँख, कान, ज़ुबान वग़ैरा।

⚫ पहली तारीख़ से लेकर नवीं तारीख़ तक जितने दिन भी हो सके रोज़ा रखें, ख़ुसूसन नवीं तारीख़ यानी अरफ़ा के दिन ज़रूर रोज़ा रखें।

⚫ ज़ुल्हिज्जा की पहली रात से लेकर दसवीं रात तक हर रात में जितनी देर भी हो सके इबादत करें।

⚫ अगर रात के आख़िरी हिस्से में जागना आसान हो तो इशा पढ़ कर फौरन सो जाएं और रात के आख़िरी हिस्सा में उठ कर इबादत में मसरूफ़ होजाएं; क्यूंकि रात का आख़िरी हिस्सा बहुत क़ीमती होता है, उस वक़्त इबादत करने वालों से अल्लाह बहुत ख़ुश होते हैं। और अगर आख़िरी हिस्सा में जागना दुशवार हो तो इशा के बाद ही जितनी देर भी हो सके इबादत में मशग़ूल रहें फिर सो जाएं।

⚫ माँ बाप की ख़िदमत करते रहें, उनको हर तरह से आराम पहुंचाने की कोशिश करें, उनकी किसी बात का जवाब इस तरह हरगिज़ ना दें कि उनको मामूली तकलीफ़ भी पहुंचे।

⚫ पड़ोसी के साथ अच्छा सुलूक करें, हमारे घर में कोई अच्छी चीज़ बने तो थोड़ा सा पड़ोसी के घर भी भेजवा दें।

⚫ हर एक के साथ अच्छे अख़्लाक़ से पेश आएं।

⚫ हमारे साथ कोई बुरा सुलूक करे तब भी हम उस के साथ अच्छा बरताव ही करें।

⚫ सच्चाई और दयानतदारी के साथ तिजारत और कारोबार करें।

अल्लाह तआला हम सबको अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन

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